भीमबेटका की ऑडिटोरियम गुफा में पत्ती जैसी एक छाप को 2021 के शोधपत्र ने डिकिन्सोनिया बताया। यह लगभग 55 करोड़ वर्ष पहले के जीवों में गिना जाता है। पहचान सही होती तो भारत के प्राचीन जीवन के अध्ययन में महत्वपूर्ण प्रमाण मिलता।
दोबारा जांच में सतह ने पहला सवाल उठाया। छाप का कुछ भाग चट्टान की परत पर था, कुछ उसे काटती हुई सतह पर। अप्रैल और अगस्त 2022 की तस्वीरों में आकृति के हिस्से कम भी हो गए थे।
बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान की टीम को आसपास ताजा और सड़े मधुमक्खी-छत्ते मिले। लेजर रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी और एक्स-रे विवर्तन की जांच में शहद व मोम से मेल खाते संकेत आए। 2023 में प्रकाशित अध्ययन ने आकृति को गिरे हुए छत्ते का बचा निशान बताया।
उसी वर्ष एक अलग अंतरराष्ट्रीय अध्ययन भी छत्ते वाली व्याख्या पर पहुंचा। इस मामले में तस्वीर के आकार से आगे बढ़कर उसकी सतह, बदलती स्थिति और पदार्थ की जांच की गई। अलग-अलग प्रमाणों का एक साथ मिलना पहचान बदलने का आधार बना।
मुख्य बातें
- 2021 में आकृति को डिकिन्सोनिया कहा गया था।
- 2022 की तस्वीरों में उसका क्षय दिखा।
- प्रयोगशाला जांच में शहद और मोम के संकेत मिले।
स्रोत और संदर्भ
- Gondwana Research · Dickinsonia discovered in India and late Ediacaran biogeography ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
- Journal of the Geological Society of India · Dickinsonia tenuis reported by Retallack et al. 2021 is not a fossil, instead an impression of an extant fallen beehive ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
- Gondwana Research · Stinging News: ‘Dickinsonia’ discovered in the Upper Vindhyan of India not worth the buzz ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग · Indian scientists refute earlier find of fossil of earliest animal in Bhimbetka ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।



